दिनेश कुमार रजक/मिहिजाम:अप्रैल महीने की चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी ने मिहिजाम के जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। हाट-बाजारों से लेकर स्टेशन चौक, मिहिजाम फाटक, कांनगोई और राष्ट्रीय राजमार्ग 419 तक हर जगह राहगीरों की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है। दोपहर में सड़कें सुनसान दिखने लगी हैं और जो लोग मजबूरी में बाहर निकल रहे हैं, वे छतरी, गमछा और मास्क से खुद को बचाते नजर आ रहे हैं।

ईख रस, शरबत और बर्फ के गोले की डिमांड हाई

गर्मी बढ़ते ही ठंडे शरबत, गन्ने के रस, बर्फ के गोले और ठंडे पानी की मांग अचानक बढ़ गई है। हटिया बाजारी में खरीदारी करने आए लोग हों या दुकानदार, सभी गर्मी से बेहाल दिख रहे हैं। सड़क किनारे लगे ठेलों पर लोगों की भीड़ लग रही है। एक गिलास ठंडा शरबत या ईख रस 10 से 20 रुपये में बिक रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग मिट्टी के घड़े भी खरीद रहे हैं, जिनकी कीमत 50 रुपये से 120 रुपये तक पहुंच गई है।

पेड़ की छांव बनी सहारा

सुदूर ग्रामीण इलाकों से मिहिजाम आने-जाने वाले राहगीरों ने बताया कि रास्ते में पड़ने वाले पेड़ों की छांव ही सबसे बड़ी राहत दे रही है। बस या ऑटो का इंतजार कर रहे लोग कुछ देर पेड़ के नीचे बैठकर शीतलता पाते हैं। दोपहर 12 बजे के बाद तो हालात और खराब हो जाते हैं। तपती लू के थपेड़े सीधे चेहरे पर लगते हैं।

बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
 
इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों, नन्हे-मुन्ने बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। स्कूल से लौटते समय बच्चे पसीने से तर-बतर हो जाते हैं। बुजुर्गों को चक्कर आने और डिहाइड्रेशन की शिकायतें बढ़ गई हैं। डॉक्टर भी धूप में निकलने से मना कर रहे हैं।

बुद्धिजीवियों ने दी सलाह: 10 बजे से 4 बजे तक घर में रहें

रफ्तार मीडिया संवाददाता से बात करते हुए मिहिजाम के दर्जनों लोगों ने कहा कि इस भीषण गर्मी में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलें। एक स्थानीय निवासी ने कहा, बहुत जरूरी हो तभी घर से निकलें, और निकलें भी तो पेट भरा हो, पानी पीकर जाएं। साफ तौलिया या गमछे से मुंह और सिर को अच्छे से ढंक लें। लोगों का कहना है कि प्रशासन को भी मुख्य चौक-चौराहों पर प्याऊ और छायादार जगह की व्यवस्था करनी चाहिए। फिलहाल मिहिजाम का हर शख्स बस मानसून का इंतजार कर रहा है।