दीपचंद्र दीक्षित
नवाबगंज, फर्रुखाबाद। महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलंबन के उद्देश्य से चलाए जा रहे मिशन शक्ति अभियान की जमीनी हकीकत को लेकर नवाबगंज थाना क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अभियान का संचालन केवल औपचारिकताओं और कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर रह गया है, जबकि वास्तविक जागरूकता कार्यक्रमों का अभाव दिखाई दे रहा है।
बताया जाता है कि मिशन शक्ति अभियान के तहत पुलिस द्वारा नियमित रूप से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश मामलों में थाना परिसर के मुख्य गेट पर ही कुछ व्यक्तियों को रोककर फोटो खिंचवा ली जाती है और उसी के आधार पर अभियान की औपचारिकता पूरी कर दी जाती है।
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि विद्यालयों, बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर महिलाओं एवं बालिकाओं को जागरूक करने की अपेक्षा अभियान को थाने के गेट तक सीमित कर दिया गया है। ऐसे में मिशन शक्ति के मूल उद्देश्य की पूर्ति होती दिखाई नहीं दे रही है।
लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुपों और विभागीय रिपोर्टों में अभियान की सक्रियता तो दिखाई देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके प्रभाव और पहुंच को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि यदि अभियान वास्तव में प्रभावी ढंग से चलाया जाए तो महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ सकती है।
चर्चा यह भी है कि जब पुराने पुलिसकर्मी ही अभियान को गंभीरता से नहीं लेते दिखाई देते हैं, तो नए नियुक्त पुलिसकर्मियों के सामने भी गलत उदाहरण प्रस्तुत होता है। इससे अभियान की गंभीरता और प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
गौरतलब है कि पुलिस अधीक्षक आरती सिंह द्वारा समय-समय पर मिशन शक्ति अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि अभियान केवल फोटो सेशन और कागजी रिपोर्टों तक सीमित रह जाए तो उसके उद्देश्यों पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
फिलहाल मिशन शक्ति अभियान की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोग चाहते हैं कि अभियान को वास्तविक रूप से जन-जागरूकता से जोड़ा जाए, ताकि इसका लाभ महिलाओं और बालिकाओं तक प्रभावी तरीके से पहुंच सके।