विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव,  विजय सिंह दहिया की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई जिसमे ‘कक्षा तत्परता कार्यक्रम’ की सामग्री का विमोचन किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों तथा खंड शिक्षा अधिकारियों ने भागीदारी की।

विजय सिंह दहिया ने कहा कि ‘कक्षा तत्परता कार्यक्रम (क्लास रेडिनेस प्रोग्राम)’ के अंतर्गत विकसित विभिन्न शैक्षणिक सामग्रियों का विमोचन हुआ है जिसमे शिक्षकों के लिए विषयवार समय-सारणी, विद्यार्थियों हेतु गतिविधि पुस्तिका (ऐक्टिविटी बुक) तथा 45 दिनों की प्रगति को व्यवस्थित रूप से ट्रैक करने के लिए एक प्रभावी मॉनिटरिंग टूल शामिल है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से अप्रैल एवं मई माह में संचालित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को नई कक्षा के लिए शैक्षणिक रूप से तैयार करना एवं उनकी बुनियादी दक्षताओं को सुदृढ़ करना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के लगभग 8 लाख से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित होंगे, जिसे लगभग 31,000 शिक्षकों के माध्यम से प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत फाउंडेशनल लिटरेसी एवं न्यूमरेसी (एफ एल एन) को मजबूत करना शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है। ‘निपुण भारत मिशन’ इसी दिशा में एक सशक्त पहल है, जिसका उद्देश्य बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं में ही ग्रेड-स्तरीय दक्षता प्रदान करना है।”

उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे कई मामलों में हरियाणा अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन रहा हैं। इसके अलावा शिक्षा मंत्री  महिपाल ढांडा के मार्गदर्शन में बच्चों के समग्र विकास के लिए सतत् प्रयास किए जा रहे हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं।‘

उन्होंने विभिन्न आकलन रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘राज्य की शैक्षिक स्थिति बहुत अच्छी है निपुण में हम देश में तीसरे स्थान पर है। इसी संदर्भ में 45 दिवसीय ‘कक्षा तत्परता कार्यक्रम’ अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य बच्चों की सीखने में आई कमी को दूर करना तथा उन्हें ग्रेड-स्तरीय दक्षता तक पहुंचाना है।

उन्होंने सभी शिक्षकों से आह्वान किया कि ‘वे प्रत्येक बच्चे पर विशेष ध्यान केंद्रित करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा पीछे न रह जाए। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, शिक्षक की भूमिका सदैव केंद्रीय और महत्वपूर्ण बनी रहेगी।’ बैठक के दौरान ‘प्रवेश उत्सव’ के अंतर्गत नामांकन अभियान की भी समीक्षा की गई और निर्देश दिए कि राज्य में ‘जीरो ड्रॉपआउट’ सुनिश्चित किया जाए और कोई भी बच्चा विद्यालय से बाहर न रहे। इस मौके पर निदेशक, मौलिक शिक्षा  मनीता मलिक, राज्य परियोजना निदेशक श्रीमती वर्षा खांगवाल ने भी संबोधित किया।