हुगली में राहत घोटाले को लेकर राजनीतिक पारा चरम पर है। सरकारी राहत सामग्री को अवैध रूप से जमा रखने के आरोप में हुगली जिला परिषद के पूर्व सभाधिपति और तृणमूल नेता मेहबूब रहमान को गिरफ्तार किया गया है। शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया तो कोर्ट परिसर में विरोध की तस्वीरें सामने आईं। मौजूद लोगों के एक हिस्से ने गिरफ्तार नेता को देखते ही ‘चोर-चोर’ के नारे लगाने शुरू कर दिए, जिससे भारी हड़कंप मच गया।

आरोप है कि आम लोगों के लिए आवंटित सरकारी राहत सामग्री को एक निजी गोदाम में जमा कर रखा गया था। जांच में इसी सुराग के आधार पर मेहबूब रहमान को गिरफ्तार किया गया। घटना के बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक जुबानी जंग तेज हो गई है।

इस मुद्दे पर विधायक बिमान घोष ने तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “लोगों के गुस्से से ही यह नारा उठ रहा है। किसी को सिखाना नहीं पड़ा। कानून अपना काम करेगा, जांच में जो सच साबित होगा वही सामने आएगा।”

इसके बाद बिमान घोष ने एक कदम आगे बढ़कर तंज कसा, “जेल का आकार बढ़ाना पड़ेगा, जरूरत पड़ी तो नई जेल भी बनानी पड़ेगी! जिस तरह एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोपों में तृणमूल के नेता पकड़े जा रहे हैं, उससे पुरानी जेल में जगह बचेगी या नहीं, यही अब बड़ा सवाल है।”

बीजेपी का दावा है पिछली सरकार में इस तरह की घटना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के अंदर भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करती है। दूसरी तरफ जांच एजेंसी बरामद राहत सामग्री, वित्तीय लेन-देन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। राजनीतिक गलियारों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी सनसनीखेज जानकारी सामने आ सकती है।

एक तरफ कोर्ट परिसर में ‘चोर-चोर’ की गूंज, दूसरी तरफ जेल बढ़ाने की मांग— राहत घोटाले को लेकर हुगली की राजनीति फिलहाल पूरी तरह उथल-पुथल में है।