ईरान में तेज़ी से फैल रहे विरोध प्रदर्शन में अब तक मरने वालों की संख्या कम से कम 62 हो गई है, जबकि हजारों लोग गिरफ्तार किए गए हैं और हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है। ये प्रदर्शनों देश भर में आर्थिक तंगी, गिरती मुद्रा रियाल, बढ़ती महंगाई और सरकार की नीतियों के खिलाफ 28 दिसंबर 2025 से जारी हैं। आलोचकों का कहना है कि आर्थिक हालात के साथ-साथ राजनीतिक असंतोष ने भी इन झड़पों को भड़काया है।
तेहरान सहित ईरान के सभी 31 प्रांतों में प्रदर्शनकारी सुरक्षा बलों के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। पुलिस और रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) सहित सुरक्षा एजेंसियों ने प्रदर्शनकारियों को डराने और रोकने के लिए गोलियां, शॉटगन के गोले, आंसू गैस और पानी की तोपें इस्तेमाल की हैं, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और जान गंवाई गई।
प्रदर्शनकारियों की संख्या में वृद्धि के साथ स्थिति हिंसक मोड़ ले चुकी है। कई शहरों में सरकारी भवनों और वाहनों में आग लगाई गई, सड़कें बंद कर दी गईं और इंटरनेट और संचार सेवाओं को व्यापक स्तर पर बंद किया गया ताकि प्रदर्शनकारी एकत्र न हो सकें और सूचना प्रसार पर नियंत्रण रखा जा सके।
ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्ला अली खामेनेई ने अपने समर्थकों को प्रभावित करने के प्रयास में प्रदर्शनकारियों को “विद्रोही” बताया और कहा कि शासन पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को विदेशों से प्रेरित बताकर, विशेषकर अमेरिका की ओर संकेत करते हुए कहा कि विदेश विरोधी तत्वों की मदद से देश में अराजकता फैलाई जा रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों को हिंसक ढंग से दबाया गया तो वह ईरान पर कार्रवाई कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने विशिष्ट कदमों का विवरण नहीं दिया। इस बीच यूरोपीय संघ और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी हिंसा और लोगों के अधिकारों के उल्लंघन की निंदात्मक बयानबाज़ी की है।
मानवाधिकार समूहों के अनुसार, सुरक्षा बलों की भारी प्रतिक्रिया में हजारों लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनमें कई युवाओं और कुछ बच्चों तक शामिल हैं। प्रभावित शहरों में अस्पताल अत्यधिक दबाव में हैं, और कई घायल इलाज के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह निकालता है कि ईरान में सिर्फ आर्थिक तनाव ही नहीं, बल्कि राजनीतिक असंतोष और शासन के खिलाफ व्यापक नाराज़गी भी शामिल है। यदि स्थिति इसी तरह जारी रहती है तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है, जिससे ईरान तथा उसके पड़ोसी देशों और वैश्विक राजनीति पर भी असर पड़ेगा।