दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा।
जामताड़ा के प्रसिद्ध मां चंचला मंदिर परिसर में बुधवार शाम एक संभावित बाल विवाह को प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से रोक दिया गया। शादी की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और मंडप भी सज चुका था, लेकिन बारात पहुंचने से पहले ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंच गई और विवाह समारोह को रोक दिया। जानकारी के अनुसार, कर्माटांड़ थाना क्षेत्र की एक नाबालिग लड़की का विवाह मां चंचला मंदिर में संपन्न होने वाला था। इस संबंध में किसी व्यक्ति द्वारा जामताड़ा उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आलोक कुमार को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही उपायुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश के बाद प्रभारी सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी मोहम्मद क्यूम अंसारी, जिला बाल विकास परियोजना पदाधिकारी तथा जामताड़ा अंचलाधिकारी सह बीडीओ अबिश्वर मुर्मू पुलिस बल के साथ मंदिर परिसर पहुंचे। अधिकारियों ने लड़की के परिजनों से उसकी आयु संबंधी प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा। हालांकि परिजन लड़की के बालिग होने से संबंधित कोई वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद अधिकारियों ने परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए विवाह रोकने का निर्णय लिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से एक नाबालिग लड़की का विवाह होने से बच गया। प्रभारी सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा मोहम्मद क्यूम अंसारी ने बताया कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर टीम तत्काल मौके पर पहुंची।परिजनों को समझाकर विवाह रुकवाया गया तथा उन्हें बाल विवाह के कानूनी दुष्परिणामों से अवगत कराया गया। वहीं अंचलाधिकारी सह बीडीओ अबिश्वर मुर्मू ने मंदिर प्रबंधन एवं पुजारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में विवाह कराने से पहले वर-वधू के आयु संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य रूप से करें। उन्होंने कहा कि विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष तथा लड़के की 21 वर्ष होना आवश्यक है। नियमों की अनदेखी होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है।