रांची: झारखंड सरकार ने राज्य में महिला उद्यमिता (Women Entrepreneurship) को नई दिशा देने की पहल करते हुए झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम (Jharkhand Incubator Program) का शुभारंभ किया। रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस दौरान झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम की आधिकारिक वेबसाइट और सखी सिल्क (Sakhi Silk) के वेब पोर्टल का भी लोकार्पण किया गया।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा (Mineral Resources) तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि महिला उद्यमिता, नवाचार (Innovation) और ग्रामीण उद्योगों के लिए भी राज्य नई पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि पहले चरण में 150 महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों (Women-led Enterprises) का चयन किया गया है। इन उद्यमों को IIM Calcutta Innovation Park (IIMCIP) के सहयोग से तीन वर्षों तक प्रशिक्षण (Training), मेंटोरिंग (Mentoring), ब्रांडिंग (Branding), बाजार से जुड़ाव (Market Linkage), वित्तीय सहायता (Financial Support) और डिजिटल प्लेटफॉर्म (Digital Platform) जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

यह कार्यक्रम झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और IIM Calcutta Innovation Park के संयुक्त सहयोग से संचालित किया जाएगा। राज्यभर में एक केंद्रीय हब (Hub) और पांच क्षेत्रीय स्पोक (Spokes) स्थापित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण सहायता पहुंचाई जा सके।

सखी सिल्क को मिलेगी नई पहचान

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने सखी सिल्क के वेब पोर्टल का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इसके जरिए गोड्डा और दुमका के भगैया सिल्क (Bhagaiya Silk) बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups) को एक मजबूत बाजार उपलब्ध होगा। उत्पादों की ब्रांडिंग सखी सिल्क के नाम से की जाएगी और उन्हें पलाश (Palash) एवं अदिवा स्टोर्स (Adiva Stores) के माध्यम से भी बाजार मिलेगा।

उन्होंने कहा कि अब तक भगैया सिल्क को अक्सर भागलपुर सिल्क के नाम से जाना जाता था, लेकिन GI Tag मिलने के बाद झारखंड के असली बुनकरों को उनकी पहचान और मेहनत का सम्मान मिलेगा। इससे महिला उद्यमियों और बुनकर परिवारों की आय बढ़ेगी तथा राज्य की पारंपरिक हस्तशिल्प विरासत को नई पहचान मिलेगी।

कार्यक्रम में विभागीय सचिव मनोज कुमार, JSLPS के सीईओ अनन्य मित्तल, झारक्राफ्ट की एमडी गरिमा सिंह, अटल इनोवेशन मिशन के डायरेक्टर हिमांशु जोशी सहित कई अधिकारी और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं उपस्थित रहीं।