शिकारीपाड़ा/दुमका/रफ्तार मीडिया।ललित कुमार पाल।
दुमका जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शुमार शिकारीपाड़ा के ऐतिहासिक राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित पांच दिवसीय 24 प्रहर अखंड हरिनाम संकीर्तन महायज्ञ का शनिवार को कुंजवर्ण और धूलौट के साथ भव्य समापन हो गया। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के समापन के साथ ही पूरा क्षेत्र "हरे कृष्ण, हरे राम" के महामंत्र से गुंजायमान रहा।
*मंगलवार से शुरू हुआ था भक्ति का सफर*
इस महान धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ बीते मंगलवार को पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ 'अधिवास' पूजन से किया गया था। इसके बाद से ही लगातार तीन दिनों (24 प्रहर) तक बिना रुके अखंड हरिनाम संकीर्तन चलता रहा। इस दौरान न केवल शिकारीपाड़ा, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन किए और संकीर्तन का पुण्य लाभ कमाया।
*हिंदी और बंगला कीर्तन मंडलियों ने बांधा समां*
इस वर्ष के आयोजन की सबसे खास बात भाषा और संस्कृति का अनूठा संगम रही। अनुष्ठान के दौरान हिंदी और बंगला दोनों भाषाओं में कीर्तन पाठ का अद्भुत प्रवाह देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया:
हिंदी कीर्तन पाठ: तारापुर से पधारे सुप्रसिद्ध कीर्तनकार सुभाष पंडित एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने अपनी सुमधुर आवाज और भजनों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
बंगला कीर्तन पाठ: मोयनाडाल से आए ख्यातिप्राप्त संतोष मुखर्जी एवं उनके दल द्वारा प्रस्तुत किया गया। उनके पारंपरिक और शास्त्रीय बंगला कीर्तन ने पूरे माहौल को पूर्णतः भक्तिमय और अलौकिक बना दिया।
*कुंजवर्ण के साथ समापन और महाप्रसाद वितरण*
शनिवार को अनुष्ठान के अंतिम दिन 'कुंजवर्ण' की रस्म अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई गई, जिसके बाद भक्तों के बीच 'धूलौट' (भक्ति की धूल) का कार्यक्रम हुआ। समापन के अवसर पर मंदिर कमेटी की ओर से विशाल भंडारे (महाप्रसाद) का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने कतारबद्ध होकर महाप्रसाद ग्रहण किया।
*कमेटी की सराहनीय भूमिका*
इस भव्य, अनुशासित और सफल आध्यात्मिक आयोजन को संपन्न कराने में राधा कृष्ण मंदिर समिति के सभी पदाधिकारियों, सदस्यों और स्थानीय ग्रामीणों की मुख्य व अत्यंत सराहनीय भूमिका रही। समिति के सदस्यों ने न केवल व्यवस्था संभाली, बल्कि बाहर से आए कीर्तन दलों और श्रद्धालुओं की सुविधा का भी पूरा ख्याल रखा। स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने इस सफल आयोजन के लिए काशीनाथ पाल, नीलकंठ पाल, निरोध चंद्र, सुजीत पाल, अजीत पाल, जितेंद्र पाल, मनोरंजन पाल, सामंत पाल, राकेश पाल, कौशल पाल, अर्जुन पाल, सुरेश पाल, निरंजन पाल, आदि सभी मंदिर समिति के प्रति आभार व्यक्त किया है।