रामबाग, बस्ती। धर्मेन्द द्विवेदी:। सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, रामबाग-बस्ती में शुक्रवार को शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत द्वारा आयोजित तीन दिवसीय प्रधानाचार्य कार्ययोजना बैठक का समापन हो गया।
तीसरे और अन्तिम दिन शिशु शिक्षा समिति और जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्याओं की संयुक्त बैठक से प्रारम्भ हुआ। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मा. रमेश जी, गोरक्ष प्रांत के प्रांतीय सेवा शिक्षा प्रमुख मा. योगेश जी, जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के अध्यक्ष विनोद कांत मिश्र के साथ जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मंत्री दुर्गा प्रसाद अस्थाना की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद सिंह जी द्वारा मंचासीन अतिथियों का परिचय एवं सम्मान कराया गया। विभिन्न क्षेत्रों में विशेष उपलब्धि प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया। अखिल भारतीय निबन्ध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त प्रधानाचार्या प्रतिमा सिंह को प्रमाणपत्र एवं रु.5100 के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रांत के प्रदेश निरीक्षक राम सिंह जी ने प्रधानाचार्य बैठक में पूर्ण किये गये सभी कार्यों का वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रान्त के प्रान्त प्रचारक मा. रमेश जी ने अपने सम्बोधन में कहा कि विद्या भारती के माध्यम से लोगों ने माँ भारती के अमर सपूतों को जाना। भारत को जानने के लिये हमें भारत के महापुरुषों के जीवन को जानना होगा और विद्या भारती इस कार्य को पूरी निष्ठा से कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि विद्या भारती के आचार्यों के माध्यम से लाखों देशभक्त युवा नागरिक प्रति वर्ष तैयार किये जा रहे हैं। हमारी विचार यात्रा 1925 में प्रारम्भ हुई और 100 वर्षों से भी अधिक समय तक अविरल चल रही है। लोकतंत्र में लोक बड़ा होता है,किन्तु संगठन में विचार बड़ा होता है। हम अपने लिए कार्य नहीं करते अपितु राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये कार्य करते हैं। समाज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा विभिन्न संगठन खड़े किये गये और आज शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती विश्व की सबसे बड़ी संस्था है।संघ के पंच परिवर्तनों की चर्चा करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता पर भी बल दिया और इस दिशा में विद्या भारती को भी प्रयास करने की प्रेरणा दी। पारिवारिक परम्परा को पूर्ववत जीवित करने हेतु कुटुम्ब प्रबोधन की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया। पर्यावरण संरक्षण हेतु पेड़, पानी की बचत और पॉलीथिन मुक्त समाज बनाना होगा। स्व का बोध भी आवश्यक है। नागरिक कर्तव्यों की भी जानकारी हमें समाज को देनी होगी।
समापन सत्र में मंच पर विद्या भारती पूर्वी उ. प्र. क्षेत्र के क्षेत्रीय मन्त्री डॉ. सौरभ मालवीय तथा शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मन्त्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह की उपस्थिति रही। प्रदेश निरीक्षक राम सिंह जी ने सम्पूर्ण बैठक का वृत्त निवेदन प्रस्तुत किया। वन्दना टीम ने एक गीत प्रस्तुत कर माहौल को संगीतमय बना दिया। अपने सम्बोधन में क्षेत्रीय मन्त्री डॉ. सौरभ मालवीय ने कहा कि हमारे विद्यालय ऊर्जा के केन्द्र और प्रधानाचार्य केन्द्र बिन्दु होते हैं। विद्यालय के विकास में प्रधानाचार्य का बहुत योगदान है।
अमृत महोत्सव की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि प्रत्येक जनपद में शिशु मंदिरों की स्थापना का लक्ष्य है, जो धीरे धीरे पूर्ण हो रहा है। हमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विद्या भारती के सभी विषयों को लेकर समाज तक जाना है। छोटे छोटे कार्यक्रम करके हमें स्वयं से समाज को जोड़ना है। स्वाध्याय के लिये पुस्तक पढ़ने हेतु हमें लोगों को जागरूक करना होगा। अनुशासन, परीक्षा परिणाम और विद्यालय की गुणवत्ता अच्छे विद्यालय के लक्षण हैं।
कार्यक्रम के अन्त में शिशु शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के मन्त्री डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने सभी आगन्तुक प्रधानाचार्य बन्धुओं और अन्य सभी के प्रति आभार प्रदर्शन किया। बैठक का समापन शान्ति मन्त्र के साथ हुआ।
बैठक में प्रांत के सभी विद्यालयों से आए हुए प्रधानाचार्य - प्रधानाचार्या, छात्रावास प्रमुख, शिशु वाटिका प्रमुख आचार्य और आचार्या बहनों ने भाग लिया। बलिया संभाग के संभाग निरीक्षक कन्हैया चौबे, जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक जियालाल जी आदि भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।