सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया

रांची: राज्य की मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने एक बार पुनः  ट्रेजरी घोटाले को लेकर झारखंड सरकार पर संगीन आरोप लगाया है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने तंज कसते हुए कहा की राज्य सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच ना कराकर उसे दबाने और लंबा खींचने का प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि ट्रेजरी घोटाले की विशेष ऑडिट कर रही अकाउंटेंट जनरल (एजी) को राज्य सरकार अब तक आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकी है, जिसके कारण ऑडिट की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।

*एसआईटी गठन लेकिन उसके कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल- प्रतुल शाहदेव*
मंगलवार को प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कहा कि घोटाला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जनदबाव बढ़ने के बाद एसआईटी का गठन किया गया, लेकिन उसके गठन और कार्यप्रणाली पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन ट्रेजरी अधिकारियों और डीडीओ के कार्यकाल में कथित अनियमितताएं हुईं, वे अब भी अपने पदों पर बने हुए हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 17 अप्रैल 2026 को विशेष ऑडिट के लिए एजी को अनुशंसा भेजी थी। एजी कार्यालय ने उसी सप्ताह मामले से जुड़े दस्तावेजों की मांग की थी, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए हैं। उनके अनुसार, दस्तावेजों के अभाव में विशेष ऑडिट की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।

*एसआईटी ने अब तक जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी है जिससे साजिश रचने का प्रयास किया जा रहा है*
प्रतुल शाह देव ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग और उत्पाद सचिव के नेतृत्व वाली एसआईटी ने दो महीने में केवल बोकारो जिले का दौरा किया है। इसके बावजूद अब तक जांच रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी गई है।उन्होंने बताया कि सरकार ने पहले चरण में बोकारो, हजारीबाग, रांची, रामगढ़ और देवघर समेत पांच जिलों की जांच की अनुशंसा की थी, लेकिन अभी तक अन्य जिलों में जांच शुरू भी नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की रफ्तार इतनी धीमी है कि इसे पूरा होने में वर्षों लग सकते हैं।

*चारा घोटाले का उदाहरण देकर दी गई चेतावनी*
बिहार के चर्चित चारा घोटाले का हवाला देते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा कि झारखंड सरकार को उससे सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन बिहार सरकार पर भी घोटाला सामने आने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं करने और मामले को दबाने के आरोप लगे थे। बाद में जांच केंद्रीय एजेंसी के पास गई और न्यायालय ने विभिन्न पहलुओं पर निर्णय दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यदि समय रहते निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई नहीं करती है तो इससे उसकी जवाबदेही पर सवाल खड़े होंगे। उन्होंने मांग की कि एसआईटी जांच के लिए स्पष्ट समय सीमा निर्धारित की जाए, जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

*केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग*
भाजपा ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार जांच को गंभीरता से नहीं लेती और प्रक्रिया में तेजी नहीं आती है तो पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी जानी चाहिए। प्रतुल शाह देव ने कहा कि जनता को इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच का इंतजार है तथा सरकार को जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ।