सौरभ राय/ रफ्तार मीडिया
रांची: महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता तथा माहवारी से जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करने के उद्देश्य से चलाए गए “चुप्पी तोड़ो, स्वस्थ रहो” अभियान चरण सातवीं का समापन गुरुवार को रातू प्रखंड के मुरचू गांव में किया गया। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल रांची पश्चिम के तत्वावधान में आयोजित यह अभियान 29 मई से 4 जून 2026 तक जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में चलाया गया।अभियान का उद्देश्य माहवारी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, महिलाओं एवं किशोरियों को स्वच्छ और सुरक्षित प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा माहवारी अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं सुरक्षित निपटान की आदत विकसित करना था। अभियान के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रमों, बैठकों और जन जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से माहवारी से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया।
*महावारी को लेकर जागरूकता की है आवश्यकता*
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि माहवारी एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे लेकर समाज में खुलकर चर्चा होना आवश्यक है। जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई महिलाएं और किशोरियां स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करती हैं। ऐसे में इस तरह के अभियान न केवल जानकारी प्रदान करते हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने और उनका ध्यान रखने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
*माहवारी स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई*
समापन समारोह में यूनिसेफ के वास विशेषज्ञ कुमार प्रेमचंद तथा राज्य समन्वयक श्रेया अग्रवाल ने माहवारी स्वच्छता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माहवारी के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। नियमित रूप से स्वच्छ पैड या साफ कपड़े का उपयोग, पौष्टिक भोजन का सेवन और पर्याप्त आराम महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि उपयोग किए गए पैड या कपड़े का सुरक्षित निपटान बेहद जरूरी है। खुले में फेंकने से संक्रमण और पर्यावरणीय प्रदूषण का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इन्हें सुरक्षित तरीके से गड्ढे में दबाकर नष्ट करना चाहिए।
*कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) द्वारा की गई*
कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की निदेशक रंजीता हेम्ब्रम ने की। उन्होंने उपस्थित महिलाओं और किशोरियों से माहवारी से जुड़े विषयों पर खुलकर संवाद किया तथा उन्हें स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि माहवारी को लेकर समाज में व्याप्त चुप्पी और झिझक को समाप्त करना समय की आवश्यकता है। जब महिलाएं और किशोरियां सही जानकारी और सुविधाओं से जुड़ेंगी, तभी उनका स्वास्थ्य बेहतर होगा और समाज में सकारात्मक बदलाव आएगा।
*माहवारी से जुड़े मिथकों को दूर करने का संकल्प लिया गया*
समापन कार्यक्रम में महिलाओं और किशोरियों को माहवारी स्वच्छता शपथ भी दिलाई गई, जिसमें स्वच्छता के नियमों का पालन करने, अन्य महिलाओं को जागरूक करने और माहवारी से जुड़े मिथकों को दूर करने का संकल्प लिया गया।विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर कार्यक्रम के दौरान वृक्षारोपण भी किया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधे लगाए और हरित वातावरण के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यपालक अभियंता, जिला समन्वयक, किशोरी बचाओ अभियान की टीम, ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं, जनप्रतिनिधि, जल सहिया तथा बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएं और किशोरियां उपस्थित रहीं। सभी ने अभियान को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।