मोतिहारी/ओमप्रकाश तिवारी :पताही प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सीएचओ अंजलि द्वारा पताही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के कर्मी मुकेश कुमार एवं रामकुमार पर लगाए गए गंभीर आरोपों की जांच का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन आज तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही मामले का स्पष्ट निष्पादन सामने आया।
जानकारी के अनुसार, शिकायत के बाद तत्कालीन सिविल सर्जन द्वारा मामले की जांच के लिए ढाका पीएचसी प्रभारी को नियुक्त किया गया था। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि संबंधित पक्षों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। इसके बावजूद मामले का अंतिम निष्कर्ष और दोषियों के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है।
आरोप है कि शिकायतकर्ता अंजलि न्याय की उम्मीद में लगातार विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इस मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही पर भी प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
वहीं, वर्तमान पीएचसी प्रभारी के प्रयासों से अस्पताल की व्यवस्था में सुधार लाने की कोशिशें दिखाई दे रही हैं। बावजूद इसके, कुछ कर्मियों के प्रभाव और विभागीय पकड़ को लेकर चर्चाएं बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ कर्मचारी अपने पद से अधिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हैं, जिससे निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित होती है।
रफ्तार मीडिया का सवाल है कि क्या छोटे कर्मचारियों को न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है? क्या प्रभावशाली लोगों के बीच आम कर्मियों की आवाज दबकर रह जाएगी?
वर्तमान सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार के कार्यकाल में भी यदि ऐसे मामलों का समाधान नहीं हो पाता है, तो स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आम लोगों का मानना है कि शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निष्पादन ही व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रख सकता है।
अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है और शिकायतकर्ता को न्याय दिलाने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।