पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के समक्ष पंजाब के लंबे समय से लटक रहे मुद्दों को जोरदार ढंग से रखा। मुख्यमंत्री ने पंजाब के सीमावर्ती इलाकों की पुनर्सुधार के लिए विशेष पैकेज की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री ने नीति आयोग से पहाड़ी राज्यों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर 90:10 फंडिंग के साथ पंजाब को विशेष श्रेणी का दर्जा (स्पेशल कैटेगरी स्टेटस) देने की मांग भी रखी। मीटिंग को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब को दरपेश असाधारण सुरक्षा, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों पर राज्य  का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य की आकांक्षाएं और उम्मीदें ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य से मेल खाती हैं।

*अग्रणी सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब विशेष सहायता का हकदार*
पंजाब को दरपेश विशिष्ट चुनौतियों पर पक्ष रखते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब एक अग्रणी राज्य है जिसकी पाकिस्तान के साथ 553 किलोमीटर लंबी साझा सीमा है। राज्य गंभीर और बहुपक्षीय संकट का सामना कर रहा है जिसमें लगातार सीमा पार से आतंकवाद, ड्रोन के जरिए हेरोइन और हथियारों की तस्करी जैसी चुनौतियां शामिल हैं। इसके नतीजे के रूप में युवाओं में नशीले पदार्थों की गंभीर समस्या, संगठित अपराध और बीएसएफ की निगरानी में कंटीली तार और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच की जमीन पर खेती करने वाले किसानों को रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।”
प्राकृतिक आपदाओं और सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने 2025 में आई बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को बुरी तरह झेला है, जिसमें 2,300 से अधिक गांवों को नुकसान पहुंचा और लगभग 12,905 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के बाद पंजाब के निवासियों को जिस मार का सामना करना पड़ा, उसका मंजर पूरे देश ने देखा है।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट स्थित घनी आबादी वाले गांव और कस्बे देश के दूसरे हिस्सों में हुए आर्थिक विकास से वंचित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि दशकों की अनिश्चितता और जोखिम के नतीजे के रूप में सरहदी जिलों में निवेश नाममात्र रहा है और कई मामलों में पूंजी बाहर चली गई है तथा उद्योग बंद हो गए हैं या दूसरी जगहों पर पलायन कर गए हैं। उन्होंने कहा, “हालांकि, हमारे दुश्मन पड़ोसी मुल्क के विरुद्ध पंजाब, भारत के लिए ढाल बनकर खड़ा है, पर भारत सरकार द्वारा राज्य और इसके सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए दी गई सहायता बहुत ही नाकाफी रही है।”

विकास कार्यों में भेदभाव की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “हाल ही में शुरू किए गए ‘वाइब्रेंट विलेज-II’ (गतिशील गांव-2) कार्यक्रम के तहत राज्य के सिर्फ 107 गांवों को शामिल किया गया है, जबकि 2,000 से अधिक गांव और कस्बे सरहद के बिल्कुल निकट स्थित हैं।”

*केंद्र को पंजाब की जायज और लंबे समय से लटक रही मांगों को स्वीकार करना चाहिए*
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब ने केंद्र सरकार से अंतरराष्ट्रीय सीमा को मजबूत करने और राज्य को दरपेश बहुपक्षीय चुनौतियों को हल करने के लिए बार-बार अपील की है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान से लगती हमारी अंतरराष्ट्रीय सीमा को सुरक्षित बनाने, इसे भविष्य के लिए तैयार करने और पंजाब को दरपेश बहु-पक्षीय संकट को हल करने के लिए, हम कई मौकों पर केंद्र सरकार के सामने संबंधित मांगें तुरंत रख चुके हैं। हालांकि, केंद्र ने उचित प्रतिक्रिया नहीं दी, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अनुचित है।” मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मई 2025 में गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान उठाई गई मांगों के साथ-साथ वर्तमान बैठक में पेश की गई मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “विनती है कि गवर्निंग काउंसिल की 10वीं बैठक के दौरान मेरे द्वारा उठाई गई और आज दोहराई गई पंजाब के लोगों की जायज मांगों को स्वीकार किया जाए।”

*विकसित भारत के लिए सुरक्षित एवं खुशहाल पंजाब जरूरी*
प्रधानमंत्री से पंजाब को और अधिक सहयोग देने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब और इसके लोग अपने नुकसान की कीमत पर भी देश और इसकी सरहदों को दुश्मन पड़ोसी से बचाने की अपनी वचनबद्धता पर दृढ़ हैं।”

पंजाब के मुद्दों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि राज्य की जायज और हक की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और पंजाब को देश के आर्थिक विकास में उसकी बनती मान्यता और हिस्सा दिया जाएगा।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रधानमंत्री को भरोसा दिलाया कि पंजाब ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करता रहेगा। उन्होंने कहा, “पंजाब और इसके लोग भारत को 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे। एक सुरक्षित, महफूज और खुशहाल पंजाब ही ‘विकसित भारत 2047’ की गारंटी दे सकता है।”

*‘रंगला पंजाब’ का सपना राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाता है*
पंजाब के विकास की रूपरेखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हिम्मत, उम्मीद और क्षमता की धरती पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में मुझे ‘रंगला पंजाब’ के लिए हमारा सामूहिक विजन पेश करते हुए गर्व महसूस हो रहा है, जो 2047 तक ‘विकसित भारत’ की यात्रा में अहम भूमिका निभाने के लिए दृढ़ है।” उन्होंने कहा कि चूंकि पंजाब की आकांक्षाएं राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से मेल खाती हैं, इसलिए मानव पूंजी के विकास पर केंद्रित चर्चा समयोचित और बेहद महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने परिवार-केंद्रित विकास मॉडल की उम्मीद जताई, जो हर बच्चे की भलाई सुनिश्चित करने, कामकाजी उम्र की आबादी को उत्पादक और नवाचारी बनाने तथा बुजुर्गों को सम्मान और देखभाल प्रदान करने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि इस लिए हमें अपनी अंदरूनी शक्तियों का डट कर सामना करने, लोगों को आधुनिक कौशलों के साथ सक्षम बनाने व ऐसा अनुकूल माहौल सृजित करने की जरुरत है जी उनको पंजाब व भारत के विकास सफर में सरगर्म योगदान डालने वाले व लाभार्थी बनने के योग्य बनाए।
देश की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कूली शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा पंजाब

मानव पूंजी के विकास में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि नीति आयोग की शिक्षा गुणवत्ता रिपोर्ट 2026 में पंजाब, भारत की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्कूली शिक्षा प्रणाली के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि पंजाब प्रारंभिक शिक्षा को केवल स्कूली तैयारी के रूप में नहीं, बल्कि मानव पूंजी और समान विकास में एक दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखता है। उन्होंने कहा, “मस्तिष्क का लगभग 90 प्रतिशत विकास छह वर्ष की आयु से पहले हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए पंजाब ने विकास के चरणों और सीखने के परिणामों पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाल्यावस्था और प्राथमिक शिक्षा में बड़ा निवेश किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलाव खेल-आधारित शिक्षण पद्धति, कहानी सुनाने, सामूहिक गतिविधियों और अवधारणाओं के व्यावहारिक प्रयोग के माध्यम से संभव हुआ है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान सुनिश्चित करने हेतु शुरू किए गए ‘मिशन समर्थ’ की सफलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “योजनाबद्ध अध्यापन और केंद्रित प्रयासों के कारण हमने बड़े स्तर पर सीखने के परिणामों में सुधार किया है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘परख’ मूल्यांकन में पंजाब की शीर्ष रैंकिंग निरंतर और केंद्रित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा, “पंजाब के सरकारी स्कूलों के तीसरी से नौवीं कक्षा के विद्यार्थी प्रमुख विषयों में राष्ट्रीय औसत से 10 से 15 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जो स्कूली यात्रा के दौरान लगातार हो रहे सुधार को दर्शाता है।”

हुनर शिक्षा स्कूल : शिक्षा को उद्योग से जोड़ना

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब शिक्षा को व्यावहारिक कौशल, रोजगार के अवसरों और विद्यार्थियों की आकांक्षाओं से जोड़कर स्कूली शिक्षा को नई परिभाषा दे रहा है। उन्होंने बताया कि योजनाबद्ध और उद्योगों के अनुरूप शिक्षा के माध्यम से युवाओं के लिए सार्थक मार्ग तैयार करने हेतु पंजाब के सभी 23 जिलों में 40 ‘हुनर शिक्षा स्कूल’ स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा, “वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए हुनर शिक्षा स्कूल कार्यक्रम के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा में लगभग 3,500 विद्यार्थी नामांकित हैं।” मुख्यमंत्री ने कहा कि हुनर शिक्षा स्कूलों की विशेषता व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की वरिष्ठ माध्यमिक शिक्षा के साथ पूर्ण रूप से जोड़ने में है।

संचार, प्रौद्योगिकी, करियर तैयारी तथा पंजाब की संस्कृति और विरासत पर केंद्रित बुनियादी विषयों के साथ-साथ विद्यार्थियों को उद्योग-अनुकूल क्षेत्रों जैसे हेल्थकेयर साइंसेज़ एंड सर्विसेज, डिजिटल डिजाइन एंड डेवलपमेंट, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा तथा ब्यूटी एंड वेलनेस में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि मैक्स हेल्थकेयर , इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी दिल्ली , लेबरनेट और ओराने इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं के साथ रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हमारे व