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कानपुर न्यायालय में दर्ज हुआ ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म विरोधी परिवाद

एक ओटीटी फिल्म के विवादित शीर्षक और कथित संवादों को लेकर उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर की एक अदालत में आज शनिवार को एक परिवाद (शिकायत) दायर किया गया है। परिवाद में दावा किया गया है कि ‘घूसखोर पंडत’ नामक फिल्म की टीज़र से ब्राह्मण समाज की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है और उनके विरुद्ध घृणा फैलाई गई है।

*परिवाद के मुख्य आरोप*

परिवादी, अधिवक्ता नितिश मिश्रा ने फिल्म के प्रोडक्शन कंपनी, निर्माता, अभिनेता, निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स सहित कुल छह विपक्षियों के खिलाफ यह शिकायत कानपुर न्यायालय के जे एम 4 में दायर की है।

*मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:*

· धार्मिक भावनाओं को आघात: परिवाद के अनुसार, फिल्म के शीर्षक में ‘पंडित’ शब्द को ‘घूसखोर’ विशेषण के साथ जोड़कर ब्राह्मण समाज और सनातन धर्म की गरिमा को अपमानित किया गया है।
· समाज के प्रति घृणा: यह आरोप है कि फिल्म की टीज़र में बार-बार अपमानजनक संवादों का प्रयोग करके पूरे ब्राह्मण समाज को बदनाम किया गया है और समाज में वैमनस्य फैलाने का प्रयास किया गया है।

*संभवतः आर्थिक लाभ के लिए किया गया कार्य:* 
परिवादी का कहना है कि यह सब जानबूझकर और दूषित मानसिकता से आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से किया गया है।
*पुलिस द्वारा शिकायत न दर्ज करना:*  परिवादी ने दावा किया है कि इस मामले में उन्होंने 06 फरवरी, 2026 को कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया और उन्हें टाल दिया गया। उन्हें बताया गया कि यह एक "समाज का मामला" है जिसमें पुलिस कुछ नहीं कर सकती।

*परिवादी की मांग*

परिवादी नितिश मिश्रा ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि सभी विपक्षियों (आरोपियों) को तलब करके उनके खिलाछ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के अंतर्गत उचित कानूनी कार्रवाई करते हुए दंडित किया जाए।

*परिवाद दायर करने वाले अधिवक्ता का बयान*

इस परिवाद को दायर करने में सहयोग करने वाले अधिवक्ता प्रत्यूष मनी मिश्रा ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा कि यह फिल्म विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को निशाना बनाकर उन्हें नीचा दिखाने के उद्देश्य से बनाई गई है। उन्होंने कहा, "हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और किसी भी सूरत में इसे पूरे भारत में कहीं भी रिलीज नहीं होने देंगे।"

*पुलिस की प्रतिक्रिया और संभावित कानूनी प्रावधान*

· पुलिस की भूमिका: परिवादी के थाने में शिकायत न दर्ज किए जाने के दावे के बीच, यह मामला पुलिस द्वारा शिकायतों को दर्ज करने में आनाकानी के व्यापक चिंताओं को एक बार फिर रेखांकित करता है। हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में दो थानाध्यक्षों को कर्तव्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया था।
· संभावित कानूनी धाराएं: इस मामले में, यदि पुलिस या न्यायालय कोई अपराध मानता है, तो भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की निम्नलिखित धाराएं लागू हो सकती हैं:
 · धारा 295A: धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आशय से किया गया जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य।
 · धारा 153A: धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवासस्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
 · धारा 505(2): जनता के किसी वर्ग के बीच डर या अलार्म फैलाने वाले कथन।

*अगले कदम*

न्यायालय अब इस परिवाद पर विचार करेगा और यह तय करेगा कि इसे स्वीकार कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएं या फिर पुलिस से जांच रिपोर्ट मांगी जाए। इसके अतिरिक्त परिवादी अधिवक्ता ने यह भी कहा है कि समूचे भारत में इस फिल्म को रिलीज होने से रोका जाएगा यह फिल्म हमारे ब्राह्मण समाज को टारगेट करती हुई और हमारे समाज को नीचे दिखाने के उद्देश्य से बनाई गई है ।

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