वाराणसी ब्रेकिंग/रिपोर्टर -आशुतोष मिश्रा
कमिश्नरेट वाराणसी की चोलापुर पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक अंतर्राज्यीय अवैध हथियार तस्कर गैंग का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गैंग के सरगना एवं चोलापुर थाने के हिस्ट्रीशीटर अखिलेश उर्फ मोनू राजभर समेत सात शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में अवैध असलहे, जिंदा कारतूस, चोरी की मोटरसाइकिल और मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
*डीसीपी वरुणा जोन प्रमोद कुमार* ने बताया कि धरसौना तिराहे पर चेकिंग के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि कटारी ब्लॉक अंडरपास के पीछे हथियार सप्लायर गैंग किसी बड़ी वारदात की तैयारी में जुटा है। सूचना मिलते ही चोलापुर पुलिस और एसओजी प्रभारी गौरव कुमार सिंह के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर सातों बदमाशों को दबोच लिया।
*गिरफ्तार आरोपी*
पुलिस ने अखिलेश उर्फ मोनू राजभर (गैंग लीडर), अरुण राजभर, हिमांशु उर्फ सनी, आभाष सिंह, विशाल सिंह, अनिकेत चौहान और नमन मिश्रा उर्फ अस्तीशू को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों के निवासी बताए गए हैं।
*बरामद हुआ हथियारों का जखीरा*
पुलिस के अनुसार आरोपियों के कब्जे से 32 बोर की रिवाल्वर, 7.65 एमएम और 9 एमएम की पिस्टल, 315 बोर का देसी तमंचा, कुल 13 जिंदा कारतूस, एक चोरी की मोटरसाइकिल और छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।
*सोशल मीडिया से चल रहा था तस्करी का नेटवर्क*
पूछताछ में खुलासा हुआ कि गैंग का नेटवर्क बिहार से जुड़ा हुआ है। आरोपी बिहार से सस्ते दामों में अवैध हथियार खरीदकर लाते थे और Instagram व WhatsApp के जरिए ग्राहकों से संपर्क कर हथियारों की तस्वीरें भेजकर सौदे तय करते थे। पुलिस के मुताबिक गिरोह में कुछ ऐसे युवक भी शामिल हैं जो अभी स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।
*हिस्ट्रीशीटर है गैंग का सरगना*
गिरफ्तार अखिलेश उर्फ मोनू राजभर चोलापुर थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ हत्या, लूट और गैंगस्टर एक्ट समेत कई गंभीर आपराधिक मुकदमे पहले से दर्ज हैं।
*पुलिस टीम को मिला 20 हजार का इनाम*
इस बड़े खुलासे और हथियार तस्करी के नेटवर्क को ध्वस्त करने पर चोलापुर पुलिस और एसओजी टीम को 20 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। पुलिस अब इस सिंडिकेट के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक खंगाल रही है ताकि बिहार में बैठे मुख्य सप्लायरों तक पहुंचा जा सके।
*पुलिस का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो यह गैंग किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम दे सकता था।*