रामपुर के अधिवक्ता की दिन-दहाड़े हत्या से आक्रोश बस्ती जिले में वकीलों ने सड़क पर उतरकर किया प्रदर्शन
लोकेशन - बस्ती। धर्मेन्द्र द्विवेदी:रामपुर जनपद में अधिवक्ता फारूक अहमद की बुधवार को दिन-दहाड़े हुई निर्मम हत्या के विरोध में यहां गुरुवार को बस्ती जिले के वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दुस्साहसिक वारदात के विरोध में जिले भर के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह विरत रहे और सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया। वकीलों के कार्य बहिष्कार के चलते कचहरी के अंदर सन्नाटा पसरा रहा और दूर-दराज से आए वादकारियों को बिना सुनवाई के वापस लौटना पड़ा।
सिविल बार एसोसिएशन के आह्वान पर सुबह से ही अधिवक्ता कचहरी परिसर में एकत्रित होने लगे थे। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने एक शोक सभा आयोजित कर मृतक साथी को श्रद्धांजलि दी और उसके बाद न्याय मार्ग पर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। जुलूस की शक्ल में नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अपराधी बेखौफ हो चुके हैं और अब न्याय के प्रहरियों पर भी हमले हो रहे हैं। वकीलों ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजकर हत्यारोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।
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एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट'लागू करने की उठी मांग
प्रदर्शन के दौरान बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रमाशंकर पांडेया व महामंत्री मारूत शुक्ला, पूर्व मंत्री अविनाश त्रिपाठी, पूर्व कार्रकारिणी सदस्य सिद्धार्थ, रामप्रसाद चौरसिया आदि अधिवक्ताओं ने कहा कि दिन-दहाड़े हुई यह वारदात पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। अधिवक्ता समाज खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। हमारी मांग है कि प्रदेश में जल्द से जल्द एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए ताकि अधिवक्ता निर्भीक होकर अपना कार्य कर सकें। दिन भर प्रदर्शन जारी रहा। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपियों को जल्द नहीं पकड़ा गया, तो यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
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अधिवक्ताओं की मुख्य मांगें:
: हत्यारोपियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी।
: मृतक के आश्रितों को 50 लाख रुपये का मुआवजा।
: जिले के अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम।
: प्रदेश में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल प्रभावी बनाना।
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