मैक्लुस्कीगंज: दागी हो रही 'मिनी लंदन' की वादियों की सूरत, अवैध कोयला और बालू के खेल में प्रशासन मौन
मैक्लुस्कीगंज। प्रकृति की गोद में बसे और 'मिनी लंदन' के नाम से विख्यात मैक्लुस्कीगंज थाना क्षेत्र में इन दिनों माफियाओं का राज चल रहा है। क्षेत्र में कोयला और बालू का अवैध धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आलम यह है कि माफिया बेखौफ होकर प्राकृतिक संसाधनों की लूट मचा रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन की भूमिका केवल 'दिखावे' की कार्रवाई तक सीमित रह गई है।
दिखावे की कार्रवाई, हकीकत जस की तस
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब भी दबाव बढ़ता है, प्रशासन औपचारिकता पूरी करने के लिए इक्का-दुक्का छापेमारी कर देता है। लेकिन इन कार्यवाइयों का धरातल पर कोई स्थाई असर नहीं दिखता। शाम ढलते ही सड़कों पर अवैध बालू और कोयले से लदे वाहनों की कतारें माफियाओं के बुलंद हौसलों की गवाही देती हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत हो रहा है ताकि कागजों पर कार्रवाई दिखे और धंधा भी बदस्तूर जारी रहे।
राजस्व को चपत, पर्यावरण को खतरा
अवैध उत्खनन से न केवल सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लग रहा है, बल्कि क्षेत्र का पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) भी पूरी तरह चरमरा गया है। बालू के अंधाधुंध उठाव से नदियों का अस्तित्व खतरे में है, वहीं अवैध कोयला खनन से आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा और प्रदूषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
प्रमुख बिंदु:
बेखौफ माफिया: थाना क्षेत्र के विभिन्न रास्तों से रात-दिन अवैध परिवहन जारी।
प्रशासनिक सुस्ती: बड़ी कार्रवाई के बजाय केवल खानापूर्ति पर जोर।
ग्रामीणों में रोष: स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिना सांठ-गांठ के इतना बड़ा खेल संभव नहीं।
निष्कर्ष: अगर समय रहते वरीय अधिकारियों ने इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया, तो वह दिन दूर नहीं जब मैक्लुस्कीगंज की पहचान केवल इन अवैध धंधों के कारण रह जाएगी। प्रशासन की चुप्पी कई अनसुलझे सवाल खड़े कर रही है।
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