गांडेय:राजु मंडल:गांडेय प्रखंड में एक तरफ राज्य और केंद्र सरकार हर घर नल-जल.योजना के जरिए हर परिवार तक शुद्ध पेयजल पहुँचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर गांडेय प्रखंड के बाँकीकला पंचायत अंतर्गत बढ़ही टोला की जमीनी हकीकत इन दावों के परखच्चे उड़ा रही है। यहाँ आज भी ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए आदिम युग की तरह 'डाड़ी' (कच्चे गड्ढे) के दूषित पानी पर निर्भर हैं। पानी की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि महिलाओं को अपनी दैनिक दिनचर्या छोड़कर घंटों पानी के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
सूरज ढलने से पहले शुरू होती है पानी की जंग।
बढ़ही टोला की महिलाओं की सुबह सूरज निकलने से पहले ही पानी की चिंता के साथ शुरू होती है। गाँव में लगे चापाकल जवाब दे चुके हैं और जल-नल योजना का लाभ इस टोले तक पहुँचा ही नहीं है। पीने के पानी के लिए ग्रामीण खेतों में बने डाड़ी के भरोसे हैं। यह पानी न केवल गंदा है, बल्कि इससे जलजनित बीमारियों के फैलने का भी गंभीर खतरा बना हुआ है। मजबूरी ऐसी कि प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों के पास इस दूषित पानी के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
*स्नान के लिए 2 किलोमीटर की पदयात्रा*:-
पानी की विकट स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गाँव की महिलाओं को स्नान करने और कपड़े धोने के लिए गाँव से 1 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। भीषण गर्मी और तपती धूप में 2 किलोमीटर की आवाजाही सिर्फ शरीर साफ करने के लिए करनी पड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
*समाधान: 1000 फीट गहरी बोरिंग की दरकार*:-
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में जलस्तर काफी नीचे चला गया है। सामान्य चापाकल यहाँ सफल नहीं हो रहे हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि प्रशासन यहाँ डीप बोरिंग (लगभग एक हजार फीट) कराए, तभी इस भीषण जल संकट से निजात मिल सकती है। बिना स्थायी व्यवस्था के जल-नल योजना यहाँ सिर्फ एक सपना साबित हो रही है।
व्यवस्था के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त करते हुवे मुख्य रूप से सुलेखा देवी, नीलम देवी, ममता देवी, बामेली देवी, कौसल्या देवी, रीना देवी और देनेश्वर राणा सहित कई ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों ने जल्द ही पेयजल की व्यवस्था की सरकार से मांग की है।