भड़काऊ नारेबाजी को लेकर उठे विवाद पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNSU) ने अपना पक्ष साफ किया है। JNSU ने बयान जारी कर कहा है कि हालिया प्रदर्शन को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और कुछ चुनिंदा नारों को आधार बनाकर पूरे आंदोलन की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है। छात्र संघ का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण था, लेकिन कुछ वीडियो क्लिप्स और दावों के जरिए इसे भड़काऊ बताने का प्रयास किया गया।

JNSU ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन का मकसद छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाना था, न कि किसी तरह की नफरत या उकसावे को बढ़ावा देना। छात्र संघ के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में लंबे समय से फीस, हॉस्टल, अकादमिक सुविधाओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर छात्रों में असंतोष है। इन्हीं मांगों को लेकर छात्र एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे थे। JNSU का आरोप है कि प्रदर्शन के मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भड़काऊ नारेबाजी का आरोप लगाया जा रहा है।

छात्र संघ ने यह भी कहा कि किसी भी बड़े प्रदर्शन में अलग-अलग आवाजें हो सकती हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि पूरे आंदोलन को उसी नजरिए से देखा जाए। JNSU ने दावा किया कि जिन नारों को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है, वे या तो संदर्भ से बाहर हैं या फिर जानबूझकर गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं। छात्र संघ ने प्रशासन और मीडिया से अपील की है कि वे बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष न निकालें।

JNSU के बयान में यह भी कहा गया है कि विश्वविद्यालय हमेशा से लोकतांत्रिक विचारों और अभिव्यक्ति की आज़ादी का केंद्र रहा है। छात्र संघ का कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध और सवाल उठाना छात्रों का अधिकार है, और इसे दबाने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। JNSU ने यह भी दोहराया कि वह किसी भी तरह की हिंसा या नफरत फैलाने वाले नारेबाजी का समर्थन नहीं करता।

वहीं, इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कहा गया है कि वे पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि परिसर में शांति बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। इस बीच, राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है और अलग-अलग दल अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

JNSU ने अंत में कहा कि छात्रों के असली मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, न कि बेबुनियाद आरोपों के जरिए आंदोलन को बदनाम किया जाए। छात्र संघ ने चेतावनी दी कि अगर छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे। फिलहाल, भड़काऊ नारेबाजी को लेकर जारी विवाद के बीच JNSU का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है।