दीनबंधु राउत / रफ्तार मीडिया संवाददाता जामताड़ा
जामताड़ा प्रखंड अंतर्गत सुपायडीह पंचायत के पाकडीह गांव में शुक्रवार को संपन्न जल सहिया चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। चयन प्रक्रिया में अनियमितता, पक्षपात, महिलाओं की उपेक्षा तथा बाहरी-भीतरी के नाम पर योग्य अभ्यर्थियों को वंचित किए जाने का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों एवं ग्रामीण महिलाओं ने शनिवार को संयुक्त रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की है। बीडीओ को दिए गए आवेदन में कहा गया है कि जल सहिया पद के लिए कुल आठ अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें कई उम्मीदवार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं सरकारी मानकों के अनुरूप पात्र थे, लेकिन ग्रामसभा के दौरान कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा उन्हें "बाहरी" बताकर समर्थन से वंचित किया गया। आरोप है कि चयन प्रक्रिया के दौरान योग्यता और पात्रता को दरकिनार कर एक विशेष उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बनाया गया तथा कम योग्य अभ्यर्थी का समर्थन कर चयन सुनिश्चित किया गया।आवेदनकर्ताओं का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों को बाहरी बताया जा रहा है, वे वर्षों से गांव में निवास कर रहे हैं और ग्रामसभा, सामाजिक गतिविधियों तथा विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे लोगों को केवल बाहरी-भीतरी की संकीर्ण मानसिकता के आधार पर सरकारी योजनाओं और अवसरों से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।महिलाओं ने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि जल सहिया चयन महिलाओं से संबंधित प्रक्रिया होने के बावजूद ग्रामसभा में महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार ग्रामसभा में महिलाओं की पर्याप्त उपस्थिति एवं सहभागिता आवश्यक है, लेकिन चयन के दौरान इस पहलू की अनदेखी की गई। महिलाओं ने आरोप लगाया कि ग्रामसभा में 50 प्रतिशत महिला उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई और न ही अधिकांश महिलाओं की राय को महत्व दिया गया। संयुक्त आवेदन में यह भी कहा गया है कि यदि सरकारी योजनाओं एवं चयन प्रक्रियाओं में योग्यता के बजाय दबाव, प्रभाव और बाहरी-भीतरी जैसे मुद्दों को आधार बनाया जाएगा, तो इससे योग्य एवं शिक्षित महिलाओं का मनोबल टूटेगा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर लोगों का विश्वास कमजोर होगा।प्रखंड कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपने वालों में अभ्यर्थी मौसमी राय, शमा बानो, पुतुल बाउरी, मुनमुन खातून, रितु बाउरी एवं आशा परवीन शामिल थीं। वहीं ग्रामीण महिलाओं में बबली बाउरी, समानती बाउरी, माधवी बाउरी, नेहा बाउरी, देवी बाउरी, टुम्पा बाउरी, मेनका बाउरी, लखुमनी बाउरी, पिंकी बाउरी, चंचला बाउरी, अनुपमा मौजेस सहित कई अन्य महिलाओं ने भी आवेदन पर हस्ताक्षर कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।आवेदनकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ग्रामसभा की कार्यवाही की समीक्षा की जाए तथा जांच पूरी होने तक चयन प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो चयन को निरस्त कर पुनः पारदर्शी एवं नियमसम्मत तरीके से चयन कराया जाए। इस मामले को लेकर पंचायत क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं से जुड़े चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता और महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं आवेदन देने वाली महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला प्रशासन एवं उच्च अधिकारियों के समक्ष भी अपनी बात रखेंगी और न्याय के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगी। अब पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों और अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं।