दिनेश कुमार रजक/रफ्तार मीडिया संवाददाता
जामताड़ा जिला अंतर्गत मिहिजाम राजवाड़ी स्थित वर्षों पुराने ऐतिहासिक काली मंदिर के नवनिर्मित भवन का प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान बुधवार, 17 जून को श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में आस-पास के क्षेत्रों से आए स्थानीय लोगों और विशेषकर महिलाओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। पूरा क्षेत्र भक्तिमय भजनों और जयकारों से गूंज उठा।
1982 से हो रही है पूजा, अब मिला भव्य रूप
इस ऐतिहासिक बदलाव पर खुशी जाहिर करते हुए महिला सभा की सदस्यों ने बताया कि इस स्थान पर साल 1982 से ही लगातार मां काली की पूजा-अर्चना की जा रही है। शुरुआती दौर में यहां संसाधनों की कमी के कारण किसी तरह एक अस्थाई छावनी बनाकर पूजा अनुष्ठान को संपन्न किया जाता था। स्थानीय भक्तों की अटूट आस्था और महिला सभा के कड़े परिश्रम के फलस्वरूप यहां एक बेहद आकर्षक और भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो पाया है। इसी खुशी में 17 जून को नए मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अक्टूबर में होगी मूर्ति स्थापना
धार्मिक उत्सव में शामिल वार्ड संख्या 7 के स्थानीय पार्षद ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा यह पल हम सभी मिहिजाम वासियों के लिए अत्यंत गौरव और खुशियों से भरा है। वर्षों पुराने इस आस्था के केंद्र को 17 जून को एक भव्य और दिव्य रूप मिल चुका है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान संपन्न होने के बाद, आगामी अक्टूबर महीने में वार्षिक काली पूजा के पावन अवसर पर मंदिर में विधिवत रूप से मां काली की भव्य मूर्ति की स्थापना की जाएगी।
उमड़ा जनसैलाब, महाप्रसाद का हुआ वितरण
इस भव्य समारोह में आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष सहित क्षेत्र के कई गणमान्य जनप्रतिनिधि और सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
दिनभर चले वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा अनुष्ठान के बाद, शाम के समय महिला सभा की ओर से भव्य खिचड़ी भोग महाप्रसाद का आयोजन किया गया। इस भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बेहद अनुशासित तरीके से प्रसाद ग्रहण किया और तृप्ति की अनुभूति की। इस सफल आयोजन ने स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकता और धार्मिक सौहार्द की एक नई मिसाल पेश की है।