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गोट और शीप लैदर से बने एनिमल क्राफ्ट बने लोगो के लिए आकर्षण का केंद्र - स्टाल नंबर 1143 पर लगी मेला दर्शको की भीड़

 फरीदाबाद - 39 वें अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में जहाँ देश विदेश के क्राफ्टमैन अपनी कला से सभी को आकर्षित किये हुए है वही यहाँ बनी स्टाल नंबर 1143 पर लैदर एनिमल क्राफ्ट लोगो के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बकरी  और भेड़ की चमड़ी से तेयार किये गए सुन्दर शो पीस बनाने के इस क्राफ्ट को ही लैदर क्राफ्ट कहा जाता है। इस क्राफ्ट को इंदौर मध्यप्रदेश से आये क्राफ्टमैन शरीफ खान और उनका परिवार लेकर आया है. जिन्हें इस क्राफ्ट के लिए स्टेट और नेशनल अवार्ड अवार्ड मिल चुका है। मेले में आने वाले लोग अपने घरो और आफिस की सजावट के लिए इसे खरीद रहे है। वहीँ पिछले कई साल से मेले में भाग ले रहे इस क्राफ्टमैन ने बताया की पिछली चार पीढ़ियों से उनका परिवार लैदर क्राफ्ट की कला से जुड़ा हुआ है और अब उनके बच्चे भी इस क्राफ्ट को बना रहे है जिसके लिए उनके बच्चो को स्टेट अवार्ड भी मिल चुका है. शरीफ खान ने सरकार से अपील की है की हैण्डी क्राफ्ट से जीएसटी बिलकुल खत्म कर देना चाहिए ताकि हस्तशिल्प बचा रहे.  मेले के प्रांगन में दिखाई दे रहा यह 1143 नंबर स्टाल लैदर एनिमल क्राफ्ट का है जिसमे गोट और शीप लैदर से तेयार क्राफ्ट प्रदर्शित किया गया है। लैदर एनिमल क्राफ्ट बकरी और भेड़ की चमड़ी से तैयार किया जाता है और फिर उसमे खूबसूरत रंग भरकर उसे फाइनल शेप दिया जाता है. इस क्राफ्ट को लोग घरो और आफिसो में सजावट करने के लिए खरीदते है। मध्यप्रदेश इंदौर से आये क्राफ्टमैन  शरीफ खान ने बताया की लैदर एनिमल क्राफ्ट उनका पुश्तैनी पेशा है जिसके लिए उन्हें स्टेट और नेशनल अवार्ड भी अवार्ड मिल चुका है ।  उन्होंने बताया की इस क्राफ्ट को बनाने के लिए पहले वायर का स्ट्रक्चर बनाया जाता है फिर उसके ऊपर गोट या भेड़ का लैदर चढ़ाया जाता है.  जिसके बाद फिनिशिंग और कलरिंग करके इसको तैयार किया जाता है. उन्होंने बताया की वह यहाँ वाइल्ड एनिमल्स में हिरण , केमल , जिराफ , ज़ेब्रा शेर , एलिफेंट आदि सभी प्रकार के एनिमल्स के शोपीस लाये है जिसे घरो और आफिस में डेकोरेशन के लिए रखा जाता है. उन्होंने बताया की उनके पास यहाँ 150 रूपये से लेकर 25000 / रूपये तक के एडनीमल्स डेकोरेशन आइटम्स है.  क्राफमैन ने बताया की पिछली चार पश्तो से उनका परिवार हस्तशिल्प कला से जुड़ा हुआ है और अब उनके बच्चे उनके साथ इस कला में जुड़ चुके है और पिछले 15 सालों से वह लगातार सूरजकुंड मेले में आ रहे हैं इसके अलावा उन्होंने बताया कि भारत सरकार उन्हें विदेशों में भी भेजती है और देश में लगने वाले हर बड़े मेले में वह अपनी भागीदारी करते हैं l उन्होंने कहा कि पिछले साल यहां स्टॉल की कीमत 40000 थी लेकिन इस बार 61000 रखा गया है जो की बहुत ज्यादा है और वह अपील करते हैं की स्टाल की कीमत कम की जानी चाहिएl, वहीं उन्होंने कहा कि पहले उन्हें रहने के लिए जगह दी जाती थी जो कि अब बंद कर दी गई है इसलिए उन्हें किराए पर कहीं दूसरी जगह व्यवस्था करनी पड़ रही है l

 

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