खलारी : सीसीएल की रोहिणी परियोजना में मजदूरों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर स्थानीय श्रमिक संगठनों में भारी आक्रोश है। लंबे समय से मजदूरों की जायज मांगों पर प्रबंधन द्वारा मूकदर्शक बने रहने के रवैये से तंग आकर विभिन्न यूनियनों के ‘संयुक्त मोर्चा’ ने एकजुटता दिखाई है। संयुक्त मोर्चा ने प्रबंधन के इस उदासीन रवैये के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए रोहिणी परियोजना पदाधिकारी (पीओ) को एक 16 सूत्री मांग पत्र सौंपा है।
संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि प्रबंधन अगले 15 दिनों के भीतर इन ज्वलंत समस्याओं का सकारात्मक निदान नहीं करता है, तो मोर्चा बाध्य होकर चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने को विवश होगा। इस आंदोलन से होने वाले किसी भी नुकसान या औद्योगिक अशांति की सारी जवाबदेही रोहिणी प्रबंधन की होगी।श्रमिकों के हक की इस लड़ाई में सभी प्रमुख यूनियनों ने एक मंच पर आकर एकजुटता का परिचय दिया। मांग पत्र सौंपने वालों में मुख्य रूप से शामिल थेसीसीएल सीकेएस: रामप्रवेश राम,सीटू सुरेश साव,सीएमयू रामा उरांव एवं ध्वजा राम धोबी
,जेएमएस संजय कुमार एवं अनिल लोहरा,यूसीडब्ल्यूयू अमृत भोगता,आरकेएमयू गिरेन्द्र सिंह,संयुक्त मोर्चा का यह मांग पत्र रोहिणी परियोजना के शीर्ष अधिकारियों ने प्राप्त किया। पत्र लेने वाले अधिकारियों में ,दीपक कुमार (परियोजना पदाधिकारी ,शंकर प्रसाद निगम (मैनेजर),सुजीत तुल्ला (सुरक्षा अधिकारी),आकाश यादव (कार्मिक अधिकारी),ब्रजेश कुमार (एक्सेवेशन अभियंता),पी. के. सिंह (ई एंड एम अभियंता),सतपाल सिंह (सर्वे अधिकारी)
15 दिनों का अल्टीमेटम, वरना ठप होगा काम
मांग पत्र सौंपने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने कहा कि रोहिणी प्रबंधन पिछले काफी समय से मजदूरों की बुनियादी और ज्वलंत समस्याओं को नजरअंदाज कर रहा है। बार-बार ध्यान आकृष्ट कराने के बावजूद अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, जिससे मजदूरों में असंतोष चरम पर है। अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया गया है। 15 दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी वक्त चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की होगी।