आशीष कुमार मुखर्जी/मांडू /रामगढ़: अप्रैल के महीने में ही सूर्य देव के तीखे तेवरों ने जनजीवन को बेहाल करना शुरू कर दिया है। जैसे-जैसे पारा चढ़ रहा है, लोगों में ठंडे पानी की तलब बढ़ती जा रही है। जिले में गहराते बिजली संकट और भीषण उमस के बीच इस बार आधुनिक फ्रिज पर 'देशी फ्रिज' यानी मिट्टी के बर्तन भारी पड़ रहे हैं। मांडू और रामगढ़ के बाजारों में घड़ा, सुराही और मिट्टी की बोतलों की मांग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जिससे स्थानीय कुम्हारों की 'बल्ले-बल्ले' हो गई है।

*बिजली की किल्लत ने बढ़ाया रुझान*
क्षेत्र में वर्तमान बिजली की स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है। घंटों बिजली गुल रहने के कारण इलेक्ट्रॉनिक फ्रिज शोपीस बनकर रह गए हैं। ऐसे में मध्यम और निम्न आय वर्ग के साथ-साथ संपन्न लोग भी प्राकृतिक शीतलता की ओर रुख कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि घड़े का पानी न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
*बाजार में बढ़ी रौनक*
सड़कों के किनारे सजी मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर ग्राहकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। बाजार में पारंपरिक घड़ों के अलावा अब डिजाइनदार सुराही, मिट्टी की बोतलें और जार भी उपलब्ध हैं। 'लोकल फॉर वोकल' के मंत्र को अपनाते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मिट्टी की सोंधी खुशबू वाले इन बर्तनों को हाथों-हाथ खरीद रहे हैं।
*कारीगरों के लौटे अच्छे दिन*
पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार मिट्टी के बर्तनों की बिक्री में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय कुम्हारों का कहना है कि तापमान बढ़ने से उनकी रोजी-रोटी में सुधार हुआ है। बर्तन बनाने वाले एक कारीगर ने बताया, "इस साल मांग इतनी अधिक है कि दिन-रात काम करना पड़ रहा है। लोग सुराही और कैंपर जैसे मिट्टी के जार खूब पसंद कर रहे हैं। इससे हमारी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।"
*मिट्टी की सोंधी खुशबू का आकर्षण*
फ्रिज का पानी गला खराब करने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता है, जबकि मिट्टी के पात्र प्राकृतिक रूप से पानी को ठंडा रखते हैं। यही कारण है कि इस भीषण गर्मी में आम जनमानस के लिए मिट्टी के बर्तन सबसे सुलभ और सस्ता विकल्प बनकर उभरे हैं।