रफ्तार संवाददाता रंजीत पालकोट (गुमला): आस्था, श्रद्धा, प्राचीन शिवलिंगों और मां भगवती दशभुजी की पावन नगरी पालकोट इन दिनों श्रावण माह में पूरी तरह शिवमय हो गई है। नागवंशी राजाओं की ऐतिहासिक नगरी धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनी हुई है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं। दूर-दराज के गांवों एवं विभिन्न जिलों से श्रद्धालु कांवड़ में पवित्र जल लेकर पदयात्रा करते हुए बाबा बूढ़ा महादेव मंदिर पहुंच रहे हैं और स्वयंभू शिवलिंग पर जल अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की खुशहाली की कामना कर रहे हैं।पालकोट स्थित लगभग 200 वर्ष पुराने बाबा बूढ़ा महादेव मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां विराजमान स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष श्रावण माह में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मान्यता है कि सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान भोलेनाथ भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यही कारण है कि इस पवित्र धाम में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।वहीं, पौराणिक महत्व से जुड़े ऋषिमुक पर्वत स्थित बाबा आश्रम में स्थापित शिवलिंग पर भी भक्त श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे हैं। प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित यह स्थल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक शांति और भक्ति का अनूठा अनुभव प्रदान कर रहा है।श्रावण माह के दौरान पालकोट का धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 'हर-हर महादेव' तथा 'बोल बम' के जयघोष लगातार गूंज रहे हैं।श्रद्धालुओं की सुविधा और सेवा के लिए स्थानीय नवयुवक बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। जगह-जगह पेयजल, शरबत, प्राथमिक उपचार और विश्राम की व्यवस्था की गई है। कांवड़ियों की निस्वार्थ सेवा में जुटे युवा श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।श्रावण के इस पावन अवसर पर पालकोट एक बार फिर अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को जीवंत करते हुए श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।